Saturday, October 3, 2015
Saturday, May 9, 2015
अच्छे दिन आने वाले हैं।
एकदम सत्य।। वर्षों पहले से तहलका जैसी अनेक मैगज़ीन ने तथ्यपरक और आँकड़ों सहित मोदी शासन की सच्चाई को कई बार प्रकाशित किया हैं कि असलियत कुछ और है पर प्रचारित कुछ और किया जा रहा है। जिस विकास के दावे को मोदी द्वारा हर समय भुनाया गया है। वह वास्तविकता में कभी रहा ही नही है। गुजरात हमेशा से विकास और व्यवस्थाओं के मामले में सातवें-आठवें क्रम पर ही रहा है। और सुशासन का सच तो गोधरा कांड और फ़र्जी एनकाउंटर से सारी दुनिया तक जान गयी थी। पर सीएम से लेकर पीएम तक एक बात मोदी की सदा रही है वह है प्रबन्धन। प्रबन्धन प्रचार और प्रसारण का। उन्होंने देश की रग समझ ली थी और तभी मीडिया मैनेज हो या स्वम् का प्रचार तंत्र दोनों को उन्होंने बहुत ही बेहतरीन ढ़ंग से संचालित किया। अब उन्हें अगले चुनावों में फिर सफलता मिले या ना मिले पर उन्होंने पिछले चुनावों में तो इतिहास रच ही दिया है। जिस भाजपा को सत्ता की कोई राह सुलभ नही थी उसे मोदी के प्रबंधन ने ही विशाल बहुमत से सत्तासीन किया। जहाँ इसके लिए पूर्व सरकार से लोगों का मोह भंग एक कारण था वहीं तत्कालीन मंत्रियों के ऊलजुलूल बयान और बड़बोलापन भी देशवासियों की गुस्सा को बढ़ाता रहा था। राहुल का जनसामान्य से ना जुड़ना और तत्काल प्रतिक्रिया देने से बचना भी लोगों को नागवार गुजरा। वहीं मोदी ने गर्म लोहे पर ज़ुबानी हथौड़े से निरन्तर और सधे हुए चोट करना जारी रखा। जिस एंग्री यंग मेन की छवि से अमिताभ बच्चन का कैरियर चमका कुछ इसी तरह की छवि मोदी ने भी बनाई। फ़ायदा तो होना ही था क्योंकि जहाँ वास्तविकता में भारत में शासन भ्रष्टाचार से लिप्त होता जा रहा है। सारी व्यवस्थाएं चौपट और कोई ज़िम्मेदारी लेने को तैयार नही सिर्फ मलाई मारने में लगे हैं वहीं वर्तमान से कभी प्रसन्न ना रहना भी इंसानी स्वभाव है। परिवर्तन सबकी चाह होती है। लोगों ने अपने मतों को मोदी के लिए भर दिए। इसके साथ ही उनके "अच्छे दिन आने वाले हैं" जुमले ने तो कमाल ही कर दिया। और भारतीयों ने मोदी पर भरोशा जताने में कोई कसर नही छोड़ी। खैर अब सारा दारोमदार मोदी पर ही है कि अच्छे दिन वो सिर्फ अपने और अपने ख़ास लोगों के ही रखें या आम देशवासियों के भी लाएं।। जनता दोबारा अवसर देगी यह कहना अभी दूर की कोणी अर्थात् जल्दबाज़ी होगी। जिस जादुई बहुमत को मोदी ने पाया है उसी के अनुरूप जादुई विकास और सुशासन लाने की ज़िम्मेदारी भी उन पर है। पर इस एक वर्ष के गुजरने के बाद भी देश की दशा में अब तक कोई फ़र्क नही ला पाये हैं मोदी।। अब आगे देखना मजबूरी ही सही।। देखना तो होगा ही।।। इस देश में चुनाव एक ऐसा प्रयोग है जिसके रिजल्ट्स अगले 5 सालों तक देखने को हम विवश होते हैं। और एक प्रयोग देश के भविष्य को अगले कई वर्षों तक प्रभावित करने में कोई कसर नही छोड़ता।। ज़रा सा आप भी ध्यान से रहिये क्योंकि "अच्छे दिन आने वाले हैं"!!
Friday, April 10, 2015
"हार नही मानूंगा मै"
लाख बदलियां करें साजिशें,
इनके हाथ ना आऊँगा मै।
घने अन्धकार में भी अकेला
यूं ही टिमटिमाउगा मै।
चाहे जग हो जाए एक,
पीछे नही हटूँगा मै।
मिलकर सारे रोक लें रस्ते।
क़दम नही रोकूँगा मै।
ना ही हारा हूँ अब तक,
न ही कभी हांरूगा मै।
सिर्फ़.. रोक सके है मौत मुझे,
घुटने तब भी ना टेकुंगा मै।
जब सच्चे दिल के नेक इरादे,
फिर क्यों कहीं झुकूँगा मै।।
Friday, March 13, 2015
"नही चाटनी लार"
मत करो व्यर्थ बकवास।
अपनी सोच रखो अपने पास।
तुम क्या समझ सकोगे मुझको।
खुदा बनाकर ख़ुद परेशान।
लहरों के साथ नहीं हम बहते।
ख़ुद अपनी तक़दीर को रचते।
यह कहने की नही है बात।
दुनियां लिखेगी अपना इतिहास।
नही झुका हूँ नही झुकूँगा।
नही चाटनी किसी की लार।
जज़्ब कर लिया खुद को कितना।
फटा ज्वाल जो बह निकलेगा लावा।
ख़ैर समझ तू ख़ामोशी मेरी।
जो बोला तो फट जायेगी छाती।
फौलाद कहाँ हर पल खनकता।
ये पीतल काँसे का जीवन।
गरम हुआ जब अपना लोहा।
स्वर्ण रजत सब ढूंढ़ेगें कोना।
Tuesday, January 13, 2015
रचनात्मक रहो।
ईश्वर के द्वारा दिये इस अनमोल जीवन में कुछ लोगों ने इधर उधर सिर्फ झूठ बोलने के लिए ही अपना जन्म माना है।
ऐसे लोगों को ज्यादा समय मत दो क्योंकि यदि आप इनमें से नहीं हो तो हो सकता है आपको ईश्वर ने कुछ रचनात्मक करने भेजा हो।
जब ऐसे लोग अपना काम बखूबी कर रहे हैं तो आप भी अपना काम ईमानदारी से करते जाओ। सच की सबसे बड़ी खासियत यही है कि उसे किसी के प्रमाण की आवश्यकता नहीं।
देर सबेर सच सबको पता चल जाता है।
झूठों के लाख झूठे आरोपों के बाद भी रचनात्मक व्यक्ति आगे निकल जाते हैं और झूठ में मजा लेने वाले सच को कभी नही हरा पाने के दुःख में खुद ही कुढ़ते रहते हैं।
दुनिया अंततः सच जानकर ऐसे लोगो को कभी माफ़ नहीं करती और इनका बुढ़ापा बड़े कष्टों में गुजरता है क्योंकि सामने वाले का सच इनके आसपास की दुनिया जाने या न जाने पर इनका सच जरूर सब जान जाते हैं।
वहीं रचनात्मक व्यक्ति जीवन में जहाँ भी रहते हैं सदैव काँटों के बीच रहने वाले गुलाब की तरह महकते हैं।